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लव ..कैन किल यू...!

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"बहुत डगर कठिन है, प्रेम की.... लव ..कैन किल यू...! इन हवाओं में तैरती हैं इतनी नफरतें भी, गुत्थम-गुत्थम परेशां है चाहतें और मन में गोल-गोल घूमती उम्मीदें..! ये उम्मीदें ..कैन किल यू...! क्षितिज पार से आते हैं कुछ चेहरे .. उनपर बजबजाती है अनगिन बातें.. ऊंघता आकाश छितराए से हैं सपनों  के बादल ये सपने..कैन किल यू....! हर तरफ फैला है जहर जज्बातों का.. रंगीन रातों औ' बेहया ख्वाहिशों का.. अंजाम सिफर क्यूँ उन मासूम कोशिशों का.. वे कोशिशें..कैन किल यू...! उफ ये गम  और फिर बार-बार डूबना.. तेरे लिए इतना भी क्यूँ सिसकना.. फिर-फिर दौड़-पकड़  आदतों को पहनना.. ये आदतें..कैन  किल यू...! साथी; रोज चाँद का तनहा डूबना मत देखो.. उसे सोचो उसे लिख लो , प्यार से मत देखो.. उसे जी लो, पी लो , पर उस पार से मत देखो.. ये देखना..कैन किल यू...! मत करो प्यार..इसे बस मौक़ा दो.. इजहार जरूरी नही, एहसास छुपा लो वजह बासी हो ना जाये, सवाल लुटा दो.. प्यारे .. ये प्यार ..देख लेना...वुड किल यू...!" चित्र साभार: गूगल इमेज (ग्रेचर मेयर की एक पेंटिं